कोलकाता में भिलाई का जलवा, ओपन नेशनल स्केटिंग चैंपियनशिप में 15 से अधिक पदकों पर कब्जा
8 खिलाड़ियों ने जीते मेडल, रोज सुबह 4 बजे से अभ्यास और कड़ी मेहनत का मिला इनाम


भिलाई। खेल नगरी के रूप में पहचान बना रहे भिलाई के स्केटर्स ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कोलकाता में आयोजित ऑल इंडिया ओपन स्पीड स्केटिंग चैंपियनशिप में भिलाई के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 15 से अधिक पदकों पर कब्जा जमाया। प्रतियोगिता में शामिल भिलाई के सभी 8 खिलाड़ियों ने मेडल जीतकर न सिर्फ अपने शहर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। देशभर से आए 400 से अधिक खिलाड़ियों के बीच हुए कड़े मुकाबले में छत्तीसगढ़ के स्केटर्स ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि के पीछे महीनों की कठिन मेहनत, अनुशासन और जीत का जज्बा रहा। कई खिलाड़ी चोटिल होने के बावजूद प्रतियोगिता में उतरे और पदक जीतकर लौटे।

खिलाड़ियों ने बताया कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी के लिए पिछले दो महीनों से लगातार अभ्यास किया जा रहा था। रोजाना सुबह 4 बजे उठकर रोड रेस की प्रैक्टिस की जाती थी। इसके बाद दो घंटे तक रिंग में तकनीकी अभ्यास कराया जाता था। इस कठिन ट्रेनिंग का ही परिणाम रहा कि खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक अपने नाम किए। प्रतियोगिता में बतौर ऑफिशियल शामिल हुए और छत्तीसगढ़ में स्केटिंग को नई पहचान दिलाने वाले वरिष्ठ कोच दलजीत सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत रंग लाई है। उन्होंने बताया कि इस चैंपियनशिप में देशभर के 400 से अधिक खिलाड़ी शामिल हुए थे और प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन थी। इसके बावजूद भिलाई के खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास और उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर शानदार सफलता हासिल की।

दलजीत सिंह ने कहा कि स्केटिंग जैसे खेल में सफलता के लिए नियमित अभ्यास, फिटनेस और मानसिक मजबूती बेहद जरूरी होती है। भिलाई के खिलाड़ियों ने इन सभी पहलुओं पर लगातार मेहनत की और उसका परिणाम पदकों के रूप में सामने आया। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। अभिभावकों, प्रशिक्षकों और खेल संगठनों ने भी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता से प्रदेश में स्केटिंग खेल को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। भिलाई के स्केटर्स की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि यदि खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन, बेहतर प्रशिक्षण और पर्याप्त अवसर मिलें तो वे राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
