भिलाई नगर निगम की एमआईसी मेंबर रीता सिंह, पति और पुत्र पर करोड़ों की जमीन सौदे में धोखाधड़ी का केस दर्ज

दुर्ग जिले में करोड़ों रुपये के जमीन सौदे में कांग्रेस नेत्री एवं भिलाई निगम की एमआईसी सदस्य रीता सिंह, उनके पति रमेश चंद्र सिंह और बेटे मानवचंद सिंह के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर उतई थाना में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। मामले में 4.39 करोड़ रुपये के लेनदेन और कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच होगी।

भिलाई नगर निगम की एमआईसी मेंबर रीता सिंह, पति और पुत्र पर करोड़ों की जमीन सौदे में धोखाधड़ी का केस दर्ज

भिलाई। करोड़ों रुपये के जमीन सौदे को लेकर कांग्रेस नेत्री एवं भिलाई नगर निगम की एमआईसी सदस्य और वार्ड 39 के कांग्रेसी पार्षद रीता सिंह, उनके पति रमेश चंद्र सिंह और बेटे मानवचंद सिंह कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। पाटन स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) के आदेश के बाद उतई पुलिस ने तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश से जुड़े आरोपों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह मामला रायपुर निवासी बीपी सिंह द्वारा दायर निजी परिवाद से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने अदालत में आरोप लगाया था कि वर्ष 2024 में छांटा क्षेत्र स्थित गिट्टी खदान और उससे लगी करीब 25 एकड़ भूमि का सौदा 4 करोड़ 50 लाख रुपये में तय हुआ था। इस सौदे में एक चेन मशीन और दो हाइवा वाहन भी शामिल बताए गए थे। शिकायत के अनुसार, कुल सौदे के एवज में 4 करोड़ 39 लाख रुपये चेक के माध्यम से आरोपियों को भुगतान किए गए। आरोप है कि इसमें 2 करोड़ 90 लाख रुपये मानवचंद सिंह, 1 करोड़ रुपये रीता सिंह तथा शेष राशि रमेश चंद्र सिंह के खाते में जमा कराई गई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बावजूद केवल 7 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कराई गई, जबकि शेष जमीन का न तो नामांतरण कराया गया और न ही सौदे की अन्य शर्तों का पालन किया गया। बीपी सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि जिन लोगों ने जमीन बेचने का दावा किया था, वे वास्तविक भूमि स्वामी नहीं थे। शिकायत में कहा गया है कि फर्जी इकरारनामा और अन्य दस्तावेज तैयार कर असली जमीन मालिकों के स्थान पर दूसरे व्यक्तियों के हस्ताक्षर कराए गए और इसी आधार पर करोड़ों रुपये का सौदा किया गया।

मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों को जांच योग्य मानते हुए उतई पुलिस को संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत ने पुलिस को आदेश दिया है कि दर्ज एफआईआर तथा अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। पुलिस अब दस्तावेजों की वैधता, बैंकिंग लेनदेन, भूमि के वास्तविक स्वामित्व और पूरे सौदे से जुड़े अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी।

नोट: यह मामला फिलहाल न्यायालय के आदेश पर दर्ज एफआईआर और शिकायतकर्ता के आरोपों पर आधारित है। आरोपियों का पक्ष या प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।