ब्रह्माकुमारीज आनंद सरोवर बघेरा में श्रद्धापूर्वक मनाई गई मातेश्वरी ओम राधे की 61वीं पुण्यतिथि
1500 से अधिक भाई-बहनों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन, मातेश्वरी के आदर्शों और आध्यात्मिक योगदान को किया याद

दुर्ग। ब्रह्माकुमारीज के बघेरा स्थित आनंद सरोवर परिसर में संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी ओम राधे जी की 61वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर दुर्ग शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से 1500 से अधिक भाई-बहनों ने कार्यक्रम में भाग लेकर मातेश्वरी जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज दुर्ग की संचालिका बीके रीटा दीदी ने मातेश्वरी ओम राधे के जीवन, उनके आध्यात्मिक योगदान और संस्थान के विकास में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय का प्रारंभिक नाम ‘ओम मंडली’ था और इसी दौर में राधे नामक एक कन्या संस्था से जुड़ीं, जो आगे चलकर ‘ओम राधे’ के नाम से विख्यात हुईं। रीटा दीदी ने कहा कि मातेश्वरी ओम राधे ने परमात्मा द्वारा दिए गए आध्यात्मिक ज्ञान को अपने जीवन में धारण कर स्वयं को पूरी तरह परिवर्तन किया। उनकी नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना और आध्यात्मिक दृष्टि को देखते हुए उन्हें संस्था में रहने वाले सैकड़ों बच्चों की आध्यात्मिक एवं नैतिक शिक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसे उन्होंने अत्यंत सफलतापूर्वक निभाया।

उन्होंने बताया कि मातेश्वरी का जीवन अनुशासन, समर्पण और दिव्यता का प्रतीक था। उनके व्यवहार और स्नेहपूर्ण व्यक्तित्व के कारण सभी भाई-बहन उन्हें प्रेमपूर्वक "मम्मा" कहकर संबोधित करते थे। उनकी प्रेरणाएं आज भी लाखों लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। कार्यक्रम के दौरान मातेश्वरी जी के विचारों और शिक्षाओं को याद करते हुए उपस्थित लोगों ने आध्यात्मिक चिंतन किया। श्रद्धांजलि सभा के पश्चात भोग अर्पित किया गया तथा सभी भाई-बहनों को वरदान कार्ड और प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत रहा, जहां उपस्थित लोगों ने मातेश्वरी ओम राधे के जीवन मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।
