चेक बाउंस मामलों के निपटारे को मिली रफ्तार, विशेष लोक अदालत में 449 प्रकरणों का हुआ समाधान

13.88 करोड़ रुपये की समझौता राशि तय, 1001 मामलों में से 449 का हुआ सौहार्दपूर्ण निराकरण

चेक बाउंस मामलों के निपटारे को मिली रफ्तार, विशेष लोक अदालत में 449 प्रकरणों का हुआ समाधान

दुर्ग। चेक बाउंस (धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम) मामलों के त्वरित निपटारे के लिए दुर्ग में आयोजित वर्ष 2026 की पहली विशेष लोक अदालत सफल रही। इस विशेष लोक अदालत में कुल 1001 चिन्हांकित मामलों में से 449 मामलों का निराकरण किया गया, जबकि समझौता राशि 13 करोड़ 88 लाख 5 हजार 129 रुपये रही।

विशेष लोक अदालत का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दंतेवाड़ा से किया। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों के न्यायिक अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय दुर्ग में आयोजित इस विशेष लोक अदालत के लिए 15 खंडपीठों का गठन किया गया था। अदालत का मुख्य उद्देश्य चेक बाउंस से जुड़े विवादों का आपसी समझौते और संवाद के माध्यम से त्वरित, कम खर्चीला और स्थायी समाधान उपलब्ध कराना था।

माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट आकांक्षा राठौर और अंजली सिंह की विशेष टीम ने अधिवक्ताओं और पक्षकारों से लगातार संपर्क कर समझौते के लिए प्रेरित किया। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा संभव हो सका।

मध्यस्थता केंद्र दुर्ग, जिला अधिवक्ता संघ, राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के अधिकारियों तथा विधि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मध्यस्थ न्यायाधीशों की समझाइश और संवाद प्रक्रिया से कई मामलों में सहमति बन सकी।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने विशेष लोक अदालत की सफलता के लिए सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, मध्यस्थों, कर्मचारियों और पक्षकारों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालतें न्याय को सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही हैं तथा भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे।