प्रधान जिला न्यायाधीश ने किया केंद्रीय जेल दुर्ग का निरीक्षण, बंदियों की सुविधाओं और अधिकारों की समीक्षा

महिला बंदियों से की सीधी बातचीत, निःशुल्क विधिक सहायता और SPRUHA योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के दिए निर्देश

प्रधान जिला न्यायाधीश ने किया केंद्रीय जेल दुर्ग का निरीक्षण, बंदियों की सुविधाओं और अधिकारों की समीक्षा

दुर्ग। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने शुक्रवार को केंद्रीय जेल दुर्ग का निरीक्षण कर बंदियों के अधिकारों, मूलभूत सुविधाओं तथा सुधारात्मक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल में निरुद्ध बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला न्यायाधीश ने महिला प्रकोष्ठ में निरुद्ध महिला बंदियों से मुलाकात कर उनके प्रकरणों की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं साफ-सफाई की व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने जेल अधिकारियों को निर्देशित किया कि सजायाफ्ता बंदियों के अपील संबंधी प्रकरणों को अद्यतन रखा जाए तथा उन्हें उनके मामलों की वर्तमान स्थिति से नियमित रूप से अवगत कराया जाए।

उन्होंने नव आगंतुक बंदियों को उनके प्रकरणों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने और आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता एवं अधिवक्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही ऐसे बंदियों की जानकारी भी प्राधिकरण को भेजने को कहा गया, जिन्हें परिहार का लाभ दिया जा सकता है।

निरीक्षण के दौरान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की SPRUHA योजना 2025 के तहत कैदियों एवं उनके आश्रित परिवारों की सामाजिक, आर्थिक और व्यवहारिक समस्याओं पर विशेष चर्चा की गई। न्यायाधीश ने कैदियों से उनके परिवारों की स्थिति के बारे में जानकारी ली और यह समझने का प्रयास किया कि कारावास के दौरान उनके आश्रितों को आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और भरण-पोषण जैसी आवश्यकताओं को पूरा करने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने निर्देश दिया कि पात्र कैदियों और उनके परिवारों की पहचान कर उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा केंद्र और राज्य शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए। साथ ही पैरालीगल वालेंटियर्स के माध्यम से परिवारों का फील्ड स्तर पर सत्यापन कर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने को कहा।

प्रधान जिला न्यायाधीश ने निरीक्षण के बाद अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के शंकर महतो प्रकरण में दिए गए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेलों में मानवीय गरिमा, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा, विधिक सहायता और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इस अवसर पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर, जेल अधीक्षक, महिला प्रकोष्ठ प्रभारी, एलएडीसीएस के काउंसिल एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।