दीपिका की मौत मामले में 4 कर्मचारियों की नौकरी गई, लेकिन बड़े अफसरों पर कार्रवाई नहीं
जिला अस्पताल दुर्ग में खून नहीं मिलने से हुई थी सिकल सेल पीड़ित युवती की मौत, जांच में 9 कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय; कार्रवाई पर उठे सवाल

दुर्ग। जिला अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित 20 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा की खून नहीं मिलने से हुई मौत के मामले में आखिरकार 25 दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दो लैब टेक्नीशियन और दो स्टाफ नर्स सहित चार संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं तीन अन्य कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि जिस फीमेल वार्ड में मरीज भर्ती थी, वहां से ब्लड बैंक की दूरी महज 30 से 40 कदम थी। इसके बावजूद ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों ने मरीज के लिए ब्लड बैंक से खून लाने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की। जांच अधिकारियों ने इसे घोर लापरवाही मानते हुए कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

कलेक्टर अभिजीत सिंह के अनुसार रेडक्रॉस सोसायटी से नियुक्त लैब टेक्नीशियन तरन्नुम जहां और निगार परवीन की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की स्टाफ नर्स जागेश्वरी देवी और तनुजा चंद्राकर को भी तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। इसके अलावा नियमित स्टाफ नर्स अनसतसिया केरकेट्टा, पीजी रेजिडेंट डॉक्टर निखिल अग्रवाल और एनएचएम की विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. तृप्ति तिवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए उनके नियुक्तिकर्ता अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। हालांकि कार्रवाई के बाद कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। जांच रिपोर्ट में नौ कर्मचारियों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष जिम्मेदारी तय होने के बावजूद अस्पताल और ब्लड बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों पर कोई सीधी कार्रवाई नहीं की गई। कर्मचारियों और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि जब ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त उपलब्ध था, तब गंभीर मरीज को एक यूनिट रक्त तक क्यों नहीं मिल पाया और इसके लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं माना जा सकता।
मामले को लेकर अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या कार्रवाई केवल संविदा और कनिष्ठ कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या फिर पूरे सिस्टम की जवाबदेही भी तय की जाएगी। दीपिका गाड़ा की मौत ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
