युवक की चाकू मारकर हत्या करने वाले दो आरोपियों को न्यायालय ने सुनाई आजीवन सश्रम कारावास की सजा

धमतरी में वर्ष 2025 में हुए चर्चित शंकर ढीमर हत्याकांड में न्यायालय ने दोनों आरोपियों मोनू उर्फ कुई ध्रुव और जन्मदेव सोरी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। धमतरी पुलिस की त्वरित कार्रवाई, मजबूत साक्ष्य और प्रभावी विवेचना के आधार पर दोषियों को कठोर दंड मिला।

युवक की चाकू मारकर हत्या करने वाले दो आरोपियों को न्यायालय ने सुनाई आजीवन सश्रम कारावास की सजा

धमतरी। करीब डेढ़ वर्ष पहले मामूली विवाद में एक युवक की चाकू मारकर की गई हत्या के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। धमतरी पुलिस की त्वरित कार्रवाई, वैज्ञानिक विवेचना और प्रभावी साक्ष्य प्रस्तुतीकरण के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कठोर दंड दिया है। इस फैसले को धमतरी पुलिस की प्रभावी जांच और मजबूत अभियोजन का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 31 जनवरी 2025 की रात लगभग 11 बजे 24 वर्षीय शंकर ढीमर अपने साथी रितेश पेंडरिया के साथ मराठापारा क्षेत्र में आयोजित एक छठी कार्यक्रम में शामिल होने गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोनों युवक मराठा मंगल भवन के समीप पीपल के पेड़ के नीचे बैठे हुए थे। इसी दौरान आरोपी मोनू उर्फ कुई ध्रुव और जन्मदेव सोरी वहां पहुंचे और पुराने विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

देखते ही देखते विवाद हिंसक रूप ले बैठा और आरोपियों ने अपने पास रखे चाकू से शंकर ढीमर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। आरोपी लगातार उसके सीने, पेट और जांघ पर वार करते रहे। गंभीर रूप से घायल युवक को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही थाना सिटी कोतवाली धमतरी पुलिस हरकत में आई और तत्काल जांच शुरू कर दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान यह तथ्य सामने आया कि घटना से दो-तीन दिन पहले मृतक और आरोपियों के बीच साइकिल को लेकर विवाद हुआ था। मृतक द्वारा आरोपी के मामा की साइकिल वापस नहीं किए जाने के कारण दोनों पक्षों के बीच तनाव था, जो हत्या की वजह बना।

पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 351(2) एवं धारा 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, परिस्थितिजन्य प्रमाण तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को संकलित किया। इसके बाद समयबद्ध तरीके से अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष मजबूत और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। पुलिस द्वारा संकलित प्रमाणों और गवाहों के बयानों को न्यायालय ने महत्वपूर्ण माना। सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपी मोनू उर्फ कुई ध्रुव और जन्मदेव सोरी को हत्या का दोषी करार दिया।

माननीय न्यायालय ने दोनों दोषियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाने के साथ ही 500-500 रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। न्यायालय ने विचारण अवधि के दौरान जेल में बिताए गए 529 दिनों का समायोजन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 468 के तहत प्रदान किया है।

इस चर्चित हत्याकांड में दोषसिद्धि सुनिश्चित कराने में तत्कालीन विवेचना अधिकारी निरीक्षक राजेश मरई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तेजी से जांच पूरी की और साक्ष्यों की मजबूत श्रृंखला तैयार की। उनकी इसी उत्कृष्ट कार्यशैली और प्रभावी विवेचना को देखते हुए पुलिस अधीक्षक धमतरी श्रीमती भावना पांडेय ने उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

धमतरी पुलिस ने कहा है कि गंभीर अपराधों के मामलों में त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और प्रभावी अभियोजन के माध्यम से अपराधियों को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाने का अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस का मानना है कि ऐसे मामलों में दोषियों को मिलने वाली सजा समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करती है और अपराधियों के लिए कड़ा संदेश भी देती है।

प्रमुख बिंदु

  • 31 जनवरी 2025 को हुई थी हत्या की वारदात।
  • मामूली विवाद और पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह।
  • दोनों आरोपियों ने चाकू से किया था जानलेवा हमला।
  • धमतरी पुलिस ने घटना के तुरंत बाद दोनों आरोपियों को किया गिरफ्तार।
  • न्यायालय ने दोनों दोषियों को सुनाई आजीवन सश्रम कारावास की सजा।
  • तत्कालीन विवेचना अधिकारी निरीक्षक राजेश मरई होंगे पुरस्कृत।
  • एसपी भावना पांडेय ने विवेचना टीम के कार्य की सराहना की।