झीरम घाटी हमले में 13 साल बाद फैसला, 10 आरोपी दोषी

NIA कोर्ट ने 101 गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला, 16 सितंबर को सजा पर सुनवाई

झीरम घाटी हमले में 13 साल बाद फैसला, 10 आरोपी दोषी

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में करीब 13 साल बाद शनिवार को बड़ा न्यायिक फैसला आया। जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। इस प्रकरण में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला था, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ अदालत ने फैसला सुनाया।

अदालत के इस फैसले पर लंबे समय से पीड़ित परिवारों और राजनीतिक हलकों की नजर थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से बड़ी संख्या में गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, अभियोजन ने अदालत के समक्ष 101 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपियों को दोषी माना। दोषी करार दिए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियम, चैतू, कवासी कोसा, आयता मडकम, जोगा मडकमी, महादेव नाग, मुक्का मंडावी, सुमित्रा मोडियम और बंजामी समा सहित मामले में सुनवाई का सामना कर रहे अन्य आरोपी शामिल हैं। अदालत ने हत्या, हत्या के प्रयास समेत संबंधित धाराओं में दोष सिद्ध माना है।

16 सितंबर को सजा पर फैसला

दोष सिद्ध होने के बाद अब मामले में अगली नजर अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोषियों की सजा के संबंध में 16 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया जा सकता है। ऐसे में 13 साल पुराने इस मामले में अब न्यायिक प्रक्रिया का अगला और अहम चरण सजा का होगा।

25 मई 2013 को हुआ था हमला

झीरम घाटी का यह खूनी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान नक्सलियों ने काफिले को झीरम घाटी में निशाना बनाया था। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा समेत कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी। इस हमले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को गहरे तक झकझोर दिया था। एक ही हमले में प्रदेश के कांग्रेस नेतृत्व को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। घटना के बाद इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई। जांच एजेंसी ने मामले में साक्ष्य जुटाए और आरोपियों की भूमिका की जांच के बाद न्यायालय में अभियोजन आगे बढ़ाया।

13 साल बाद आया न्यायिक पड़ाव

करीब 13 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आया यह फैसला झीरम घाटी मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव माना जा रहा है। हमले में जान गंवाने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिवार लंबे समय से मामले के परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद 16 सितंबर को होने वाली सजा की सुनवाई पर सभी की नजरें टिक गई हैं।