कालीबाड़ियों में सिंदूर खेला के साथ बासंती पूजा का समापन, मां दुर्गा से पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना








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भिलाई। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर भिलाई में बंगाली समाज द्वारा आयोजित बासंती पूजा पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुई। 24 मार्च को षष्ठी से शुरू हुआ यह धार्मिक आयोजन 28 मार्च शनिवार को दशमी के साथ अपने चरम पर पहुंचा। अब 29 मार्च को मां दुर्गा का विसर्जन किया जाएगा।

शहर के हुडको, वैशाली नगर और हाउसिंग बोर्ड कालीबाड़ी में बासंती पूजा का भव्य आयोजन किया गया, जहां चारों दिनों तक भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दौरान पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चला, वहीं दशमी के दिन माहौल पूरी तरह भावनात्मक और उत्सवी रंग में रंग गया। दशमी के अवसर पर बड़ी संख्या में शादीशुदा महिलाएं पारंपरिक परिधान में पूजा स्थल पहुंचीं। विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा संपन्न करने के बाद सिंदूर खेला की परंपरा निभाई गई। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और मां दुर्गा को भी अर्पित करते हुए अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की।

ढाक की गूंजती ताल और भक्ति संगीत के बीच महिलाओं ने हंसी-खुशी इस परंपरा को निभाया। पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहा। सिंदूर खेला के जरिए महिलाओं ने मां दुर्गा को भावुक विदाई दी, मानो वे अपने मायके से विदा होकर कैलाश लौट रही हों।
बंगाली परंपरा में सिंदूर खेला केवल एक रस्म नहीं, बल्कि शक्ति, सौभाग्य और स्त्रीत्व का उत्सव है। मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप मानते हुए महिलाएं इस दिन उन्हें सिंदूर अर्पित कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
पूजा के दौरान कालीबाड़ियों में तीन दिनों तक भोग-भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी बासंती पूजा को लेकर समाज में खासा उत्साह देखने को मिला।
