भारी बारिश में भी नहीं रुके दिशा के कदम, वृद्धाश्रमों में बांटी स्वच्छता सामग्री और फल

गणपति स्थापना से पहले जरूरतमंदों के बीच पहुंची संस्था की टीम, बुजुर्गों ने गणपति आला रे के जयघोष से किया स्वागत

भारी बारिश में भी नहीं रुके दिशा के कदम, वृद्धाश्रमों में बांटी स्वच्छता सामग्री और फल

भिलाई। भारी बारिश भी सामाजिक संस्था दिशा के सेवा अभियान को नहीं रोक सकी। गणपति बप्पा के विराजमान होने से ठीक पहले शनिवार, 12 सितंबर को संस्था के सदस्य शहर के विभिन्न वृद्धाश्रमों और विशेष जरूरत वाले लोगों के आश्रय स्थल पहुंचे और जरूरत की सामग्री वितरित की।

दिशा की टीम ने पुलगांव दुर्ग, सेक्टर-8 और सेक्टर-2 के वृद्धाश्रमों के साथ ही सेक्टर-3 स्थित विशेष जरूरत वाले लोगों के आश्रय फील परमार्थम फाउंडेशन में पहुंचकर फिनायल, डिटर्जेंट, लिक्विड सोप और फलों का वितरण किया। सेक्टर-8 स्थित आस्था बहुउद्देश्यीय संस्थान के सेवा केंद्र में बुजुर्गों के बीच खासा उत्साह देखने को मिला। टीम के पहुंचते ही माहौल गणेशोत्सव के उल्लास से भर गया। बुजुर्गों ने गणपति आला रे के जयघोष के साथ संस्था के सदस्यों का स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। संस्था की ओर से बताया गया कि मानसून के दौरान संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आश्रमों में स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराई गई, ताकि बुजुर्गों और आश्रितों को साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

खास बात यह रही कि सेवा केवल सामग्री वितरण तक सीमित नहीं रही। संस्था के सदस्यों ने आश्रम में रह रहे लोगों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और उनके साथ समय भी बिताया। दिशा के सदस्यों का कहना है कि सेवा का मतलब केवल जरूरत की चीजें देना नहीं, बल्कि किसी के चेहरे पर मुस्कान और जीवन में सम्मान का एहसास पैदा करना भी है। गणपति स्थापना से पहले जरूरतमंदों के बीच खुशियां बांटना उनके लिए बप्पा की आराधना के समान है। इस सेवा अभियान में जवाहर, सुजीत चक्रवर्ती, राजेश धारकर, प्रदीप दास, शांतनु दासगुप्ता, रामानुजन राजू, दुष्यंत तिवारी, रामजी सिन्हा सहित दिशा संस्था के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में विभिन्न वृद्धाश्रमों और फील परमार्थम फाउंडेशन के प्रबंधन ने संस्था के सदस्यों का आभार जताया। बारिश के बीच हुए इस सेवा अभियान ने एक संदेश जरूर दिया कि जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाना ही सेवा का सबसे बड़ा उत्सव है।