जमीन घोटाला: सिम्पलेक्स कास्टिंग लिमिटेड की डायरेक्टर संगीता शाह और पति की अग्रिम जमानत खारिज

10 लाख लेकर नहीं कराई रजिस्ट्री, उसी जमीन पर लिया 4.50 करोड़ का लोन; कोर्ट ने कहा- मामला गंभीर

जमीन घोटाला: सिम्पलेक्स कास्टिंग लिमिटेड की डायरेक्टर संगीता शाह और पति की अग्रिम जमानत खारिज

भिलाई। दुर्ग जिले में जमीन धोखाधड़ी के चर्चित मामले में सिम्पलेक्स कास्टिंग लिमिटेड की डायरेक्टर संगीता केतन शाह और उनके पति केतन शाह को बड़ा झटका लगा है। जिला न्यायालय ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रकृति का है और आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। मामला सुपेला थाना क्षेत्र की जुनवानी स्थित विवादित जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि आरोपियों ने जमीन को विवाद मुक्त बताकर उसका सौदा किया, एडवांस राशि ली, लेकिन बाद में रजिस्ट्री करने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, उसी जमीन को आधार बनाकर करोड़ों रुपये का बैंक लोन भी लिया गया।

पीड़ित सुनील कुमार सोमन की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिषेक दास वैष्णव ने कोर्ट को बताया कि 13 मार्च 2023 को ग्राम कोहका स्थित जमीन का सौदा 50 लाख रुपये में तय हुआ था। इस दौरान संगीता शाह और केतन शाह ने जमीन को पूरी तरह विवाद मुक्त बताया और एडवांस के तौर पर 10 लाख रुपये लिए। आरोप है कि बाद में रजिस्ट्री कराने से मना कर दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपियों ने उसी जमीन पर करीब 4.50 करोड़ रुपये का लोन हासिल कर लिया। मामले में न्यायालय के निर्देश पर सुपेला थाना पुलिस ने संगीता शाह और केतन शाह के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 120बी सहित विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की है।

वहीं, आरोपी पक्ष ने अदालत में अपनी सफाई देते हुए दावा किया कि शिकायत काफी देरी से दर्ज कराई गई। उनके अनुसार कथित घटना के लगभग तीन साल बाद 8 मई 2026 को एफआईआर दर्ज कराई गई और देरी का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। आरोपी पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये वापस कर दिए गए थे। यह राशि 10 अक्टूबर 2024 को बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी, लेकिन इस तथ्य को छिपाकर कोर्ट में परिवाद दायर किया गया।

संगीता शाह की ओर से यह भी कहा गया कि लोन के लिए आवेदन 27 सितंबर 2024 को किया गया था और अक्टूबर 2024 में बैंक से राशि प्राप्त हुई, जबकि शिकायतकर्ता को अग्रिम रकम 30 सितंबर 2024 को लौटा दी गई थी। आरोपी पक्ष का कहना था कि इन तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि आरोपियों के खिलाफ पहले भी पुलगांव थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो चुका है। उस प्रकरण में हाई कोर्ट से उन्हें इस शर्त पर जमानत मिली थी कि वे भविष्य में किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। अदालत ने माना कि आरोपियों पर लगे आरोप गंभीर हैं और उपलब्ध तथ्यों से यह प्रतीत होता है कि वे पूर्व में दी गई शर्तों का पालन करने में विफल रहे हैं। अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश पी.एस. मरकाम की अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा कि यह अग्रिम जमानत दिए जाने योग्य मामला नहीं है। इसी आधार पर संगीता केतन शाह और केतन शाह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।