कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बिहार से लाए गए पांच बच्चों के मामले में ठेकेदार और फैक्ट्री प्रबंधन पर कार्रवाई के दिए निर्देश

बालगृह, आश्रय गृह, सम्प्रेक्षण गृह और प्लेस ऑफ सेफ्टी का लिया जायजा

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बिहार से लाए गए पांच बच्चों के मामले में ठेकेदार और फैक्ट्री प्रबंधन पर कार्रवाई के दिए निर्देश

दुर्ग। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न बाल संरक्षण संस्थानों का निरीक्षण किया। उन्होंने शासकीय बालगृह, बाल खुला आश्रय गृह, सेवा भारती मातृछाया बोरसी, सम्प्रेक्षण गृह पुलगांव तथा प्लेस ऑफ सेफ्टी (बालक) का दौरा कर बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, भोजन और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सबसे पहले कलेक्टर शासकीय बालगृह पहुंचे, जहां वर्तमान में 16 बच्चे निवासरत हैं। उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई, दिनचर्या और खान-पान की जानकारी ली। बच्चों के शैक्षणिक स्तर का आकलन करने के लिए गणित के सवाल भी पूछे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक बच्चे का उसकी आयु के अनुसार विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित किया जाए और सभी को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाए।

इसके बाद कलेक्टर ने बाल खुला आश्रय गृह का निरीक्षण किया, जहां सात बच्चे रह रहे हैं। निरीक्षण के दौरान पता चला कि इनमें से पांच बच्चों को बिहार से एक ठेकेदार फैक्ट्री में काम कराने के लिए लाया था। मामले को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने संबंधित ठेकेदार और फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ बाल संरक्षण कानूनों के तहत तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी बच्चों की नियमित काउंसलिंग और प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करने को कहा। कलेक्टर ने सेवा भारती मातृछाया बोरसी का भी निरीक्षण किया, जहां नवजात और छोटे बच्चों की देखभाल की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने संस्थान की व्यवस्थाओं पर संतोष जताते हुए बच्चों के स्वास्थ्य और देखभाल की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए।

पुलगांव स्थित सम्प्रेक्षण गृह में कलेक्टर ने 38 किशोरों से बातचीत कर भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किशोरों के व्यक्तित्व विकास, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पुलगांव स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी (बालक) का भी जायजा लिया, जहां 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के गंभीर अपराधों में संलिप्त किशोरों को रखा जाता है। उन्होंने स्टॉक पंजी और अन्य अभिलेखों का निरीक्षण कर रिकॉर्ड के सुव्यवस्थित संधारण के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी आर.के. जाम्बुलकर, परियोजना समन्वयक चंद्रप्रकाश पटेल सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।