भ्रष्टाचार के कई आरोपों को लेकर बीजेपी के सैकड़ों कार्यकर्ता सड़क पर उतरे, किया निगम का घेराव, महापौर को हटाने की मांग

भ्रष्टाचार के कई आरोपों को लेकर बीजेपी के सैकड़ों कार्यकर्ता सड़क पर उतरे, किया निगम का घेराव, महापौर को हटाने की मांग

भिलाई। नगर निगम भिलाई में कथित भ्रष्टाचार और महापौर को हटाने की मांग को लेकर सोमवार को भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन किया। जीई रोड स्थित निगम कार्यालय के सामने आयोजित इस प्रदर्शन ने अचानक उग्र रूप ले लिया, जब सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका।

मंच संचालन के दौरान ही भीड़ का आक्रोश बढ़ गया और कार्यकर्ता सीधे निगम के मुख्य गेट की ओर बढ़ने लगे। मौके पर तैनात पुलिस बल उन्हें रोकने में नाकाम रहा। हालांकि बाद में मुख्य गेट के पास अतिरिक्त बल ने मोर्चा संभालते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए नगर निगम में कई कथित घोटालों को मुद्दा बनाया। पार्टी नेताओं ने सफाई कर्मचारियों की हाजिरी में गड़बड़ी, डामरीकरण कार्य में अनियमितता, सफाई कर्मचारियों के पीएफ में गड़बड़ी, पेवर ब्लॉक घोटाला, पौधरोपण के नाम पर फर्जीवाड़ा, महिला आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार और निगम की खाली जमीनों की नीलामी में गड़बड़ी जैसे आरोप लगाए। निगम कार्यालय के सामने बनाए गए मंच से भाजपा नेताओं ने एक-एक कर इन मुद्दों को उठाया और निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शन के दौरान मटका फोड़कर भी विरोध जताया गया, जो प्रतीकात्मक रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्से को दर्शाता है। इस दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन, विधायक रिकेश सेन, नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा सहित 24 वार्डों के पार्षद और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। पूरे घटनाक्रम के दौरान कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल बना रहा। पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए रहे, ताकि हालात नियंत्रण से बाहर न जाएं।

200 करोड़ का बकाया बिजली बिल का भुगतान कौन करेगा
नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा ने महापौर और कांग्रेस पार्षदों पर पांच साल में 350 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ा है, जिसे ज्यादा टैक्स और शुल्क के रूप में भुगतान करना पड़ रहा है। सिन्हा ने कहा कि करीब 1 लाख 4 हजार करदाताओं पर दो-दो अधिभार लगाए गए हैं। शिक्षा कर के नाम पर हर साल करीब 4 करोड़ रुपये वसूले जा रहे हैं। वहीं गरीबों से पेनाल्टी चार्ज के रूप में करीब साढ़े 7 करोड़ रुपए लिए जा रहे हैं। उन्होंने पानी के शुल्क में बढ़ोतरी को भी मुद्दा बनाया। कहा कि पहले नि:शुल्क नल कनेक्शन देकर सिर्फ 60 रुपये मासिक शुल्क लिया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है। विकास कार्यों पर भी सवाल उठाते हुए सिन्हा ने कहा कि 45 करोड़ रुपये के डामरीकरण का टेंडर दिया गया, लेकिन जमीन पर काम नजर नहीं आता। 42 लाख रुपये के पेवर ब्लॉक और 3 से 3.5 करोड़ रुपये के वर्टिकल गार्डन का भी कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है। 2.13 करोड़ रुपए से बनाए गए तारामंडल में भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद ही वहां से सामान चोरी हो गया। कचरे से खाद बनाने के नाम पर करीब 75 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके बावजूद नगर निगम के कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा। सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि निगम पर करीब 200 करोड़ रुपए का बिजली बिल बकाया है, जिसका भुगतान अब सवाल बन गया है। उन्होंने कहा कि आम जनता से लाखों रुपये टैक्स लेने के बावजूद बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। 

महापौर और आयुक्त पर मिलीभगत का आरोप, परियोजना शाखा को बताया संगठित गिरोह
भाजपा नेता संतोष मौर्या ने फिल्म शोले का जिक्र करते हुए महापौर और आयुक्त पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि जैसे फिल्म में जय और वीरू की जोड़ी थी, वैसे ही भिलाई नगर निगम में भी एक जोड़ी काम कर रही है। मौर्या ने कहा कि इस जोड़ी में महापौर नीरज पाल को जय और आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय को वीरू’ बताया जा सकता है, जो मिलकर निगम को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनका आरोप है कि दोनों के बीच गहरी सांठगांठ है और इसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं कि भिलाई के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशान हैं। सड़क, सफाई और बुनियादी सेवाओं को लेकर जनता में असंतोष बढ़ रहा है। संतोष मौर्या ने नगर निगम की परियोजना शाखा पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यहां एक संगठित तरीके से काम करने वाला समूह सक्रिय है, जिसमें अधिकारी और ठेकेदार शामिल हैं। आरोप है कि इस तंत्र के जरिए भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

साढ़े चार साल में शहर नहीं, महापौर ने सिर्फ अपना वार्ड देखा
नगर निगम के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच भाजपा नेता विनोद सिंह ने महापौर नीरज पाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूरे साढ़े चार साल के कार्यकाल में महापौर ने एक भी वार्ड का समुचित निरीक्षण नहीं किया और सिर्फ अपने वार्ड तक ही सीमित रहे। विनोद सिंह का आरोप है कि शहर के समग्र विकास को नजरअंदाज कर केवल अपने क्षेत्र में काम कराया गया। उन्होंने कहा कि इस कार्यकाल में नगर निगम में कई तरह के भ्रष्टाचार सामने आए हैं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सफाई व्यवस्था को लेकर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, जब महापौर ने पद संभाला था तब सफाई का टेंडर करीब 30 करोड़ रुपये का था, जो अब बढ़कर 60 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके बावजूद शहर में साफ-सफाई की हालत खराब है। उन्होंने यह भी बताया कि नगर निगम की सामान्य सभा में एक जांच समिति बनाई गई थी, जिसने विभिन्न अनियमितताओं की पुष्टि की। बावजूद इसके संबंधित ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा उसी ठेकेदार को दोबारा काम देने का निर्णय लिया गया, जिसे उन्होंने कांग्रेस की नगर सरकार की मिलीभगत बताया।

55 साल में सबसे भ्रष्ट कार्यकाल-पियुष मिश्रा 
भाजपा नेता पियुष मिश्रा ने शहर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बीते साढ़े चार साल का कार्यकाल नगर निगम के इतिहास में सबसे भ्रष्ट रहा है। पियुष मिश्रा ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ वर्तमान कार्यकाल तक सीमित नहीं है, बल्कि दशकों पुरानी व्यवस्था से जुड़ी है। उनके मुताबिक, जब भिलाई गांव से शहर में तब्दील हो रहा था और नगर निगम का गठन हुआ, तब से लेकर अब तक 55 साल का इतिहास रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से करीब 48 साल कांग्रेस के नियंत्रण में रहे, जहां सिर्फ लूट हुई। उन्होंने शिक्षा उपकर एजुकेशन सेस को लेकर भी सवाल उठाए। कहा कि इस राशि का उपयोग सरकारी स्कूलों के विकास के लिए होना चाहिए था, लेकिन महापौर और उनके निर्देश पर काम कर रहे अधिकारियों ने इस फंड का दुरुपयोग किया। इसके अलावा नगर निगम के 1248 भूखंडों की बिक्री से मिली राशि को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि इस रकम को खर्च करने के लिए राज्य शासन से अनुमति जरूरी थी, लेकिन नियमों को दरकिनार कर इस राशि से ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया। पियुष मिश्रा ने कहा कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।