भिलाई इस्पात संयंत्र में जहरीली गैस रिसाव, SDRF, NDRF और BSP के सुरक्षा टीम ने किया कर्मचारियों का रेस्क्यू
जहरीली गैस रिसाव से लेकर डीकंटामिनेशन तक हुआ सजीव प्रदर्शन, 120 से 150 जवानों व अधिकारियों ने लिया हिस्सा


भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) परिसर में गुरुवार को औद्योगिक एवं रासायनिक आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए केमिकल डिजास्टर डेमोंस्ट्रेशन एवं संयुक्त मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन, SDRF, NDRF और BSP के सुरक्षा एवं अग्निशमन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभ्यास में आपात स्थिति के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया और विभागों के बीच समन्वय की क्षमता को परखा गया। अभ्यास का नेतृत्व जिला प्रशासन के एडीएम, एसडीएम तथा जिला सेनानी एवं अग्निशमन अधिकारी दुर्ग दिनेश कुमार रावटे के मार्गदर्शन में किया गया।
गैस रिसाव से निपटने का किया प्रदर्शन
मॉक ड्रिल के दौरान संयंत्र में जहरीली गैस या केमिकल रिसाव की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। टीमों ने तत्काल अलार्म सिस्टम सक्रिय करने, लीकेज को सील करने, वॉल्व बंद करने और पैचिंग तकनीक के जरिए रिसाव को नियंत्रित करने का सजीव प्रदर्शन किया।
Hazmat सूट और SCBA का व्यावहारिक उपयोग
रासायनिक रिसाव के दौरान रेस्क्यू टीम को सुरक्षित रखने के लिए Hazmat सूट और Self-Contained Breathing Apparatus (SCBA) के इस्तेमाल का अभ्यास कराया गया। टीमों ने जहरीले वातावरण में प्रवेश और बचाव कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरणों के सही उपयोग की प्रक्रिया प्रदर्शित की।
हवा की दिशा के अनुसार कराई सुरक्षित निकासी
आपदा की स्थिति में संयंत्र कर्मियों की सुरक्षित निकासी का भी अभ्यास किया गया। गैस रिसाव के संभावित प्रभाव क्षेत्र से लोगों को हवा की दिशा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित इमरजेंसी असेंबली पॉइंट तक पहुंचाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया।
डीकंटामिनेशन की प्रक्रिया भी परखी
रासायनिक पदार्थ के संपर्क में आए कर्मचारियों और रेस्क्यू टीम के सदस्यों के लिए मौके पर ही Decontamination प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। इसके तहत ऑन-साइट डीकंटामिनेशन शावर और वॉश कॉरिडोर का संचालन कर प्रभावित लोगों को रासायनिक संपर्क से मुक्त करने की प्रक्रिया दिखाई गई।
Water Curtain और Foam तकनीक का प्रदर्शन
जहरीली गैस के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए Water Curtain तकनीक का इस्तेमाल किया गया। वहीं, रासायनिक आग पर नियंत्रण पाने के लिए फोम तकनीक का भी प्रभावी प्रदर्शन किया गया।
अचेत कर्मियों को ऑक्सीजन और CPR का अभ्यास
मॉक ड्रिल के दौरान गैस के प्रभाव से अचेत हुए कर्मचारियों को तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट देने, CPR और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने का अभ्यास किया गया। इसके बाद प्रभावित कर्मियों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई।
150 तक सदस्यों ने लिया हिस्सा
संयुक्त अभ्यास में BSP के सुरक्षा अधिकारी, CISF, संयंत्र के तकनीकी स्टाफ तथा SDRF और NDRF की टीमों के करीब 120 से 150 सदस्य शामिल हुए। अभ्यास के दौरान रासायनिक आपदा की स्थिति में Quick Response, अंतर-विभागीय समन्वय और Standard Operating Procedure (SOP) के कड़ाई से पालन पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे अभ्यास वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत और बचाव दल की तैयारियों को परखने के साथ ही संभावित जान-माल के नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
