भिलाई निगम में एक कर्मचारी के नाम पर दो मृत्यु प्रमाण पत्र, अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन से सामने आया मामला

पहला प्रमाण पत्र 26 सितंबर, दूसरा 10 दिसंबर 2025 को जारी होने का दावा; बेटे ने कलेक्टर और निगम आयुक्त से की शिकायत, दस्तावेजों के सत्यापन की जांच की मांग

भिलाई निगम में एक कर्मचारी के नाम पर दो मृत्यु प्रमाण पत्र,  अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन से सामने आया मामला

मृतक के पुत्र चन्ना राजेश व पत्नी

भिलाई। नगर निगम भिलाई में एक मृत कर्मचारी के नाम पर दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने का मामला सामने आया है। मृतक के पुत्र ने दस्तावेजों में मृत्यु की जगह और पते को लेकर अंतर होने का आरोप लगाते हुए कथित गड़बड़ी की शिकायत कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त से की है। मामला अनुकंपा नियुक्ति और आर्थिक सहायता के लिए किए गए आवेदन के दौरान सामने आया। शिकायत के बाद अब प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन के दौरान सामने आया मामला

जानकारी के अनुसार, नगर निगम के जोन क्रमांक-3 में कार्यरत कर्मचारी सीएच अप्पा राव खुर्सीपार के वार्ड क्रमांक-45, स्ट्रीट-54 के निवासी थे। उनका निधन 11 सितंबर 2025 को जिला अस्पताल दुर्ग में हुआ था। इसके बाद उनके पुत्र चन्ना राजेश ने अनुकंपा नियुक्ति और नियमानुसार मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि विशाखापट्टनम निवासी चन्ना सत्यावती और चन्ना नरसिंह मूर्ति ने भी मृतक की पत्नी और पुत्र होने का दावा करते हुए आवेदन प्रस्तुत किए हैं। इसके बाद चन्ना राजेश ने सूचना के अधिकार के तहत संबंधित दस्तावेज प्राप्त किए। दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान उन्हें अपने पिता के नाम पर दूसरे मृत्यु प्रमाण पत्र की जानकारी मिली।

26 सितंबर और 10 दिसंबर को जारी हुए दो प्रमाण पत्र

शिकायतकर्ता चन्ना राजेश के अनुसार, उनके पिता का पहला मृत्यु प्रमाण पत्र 26 सितंबर 2025 को जारी किया गया था, जबकि दूसरा प्रमाण पत्र 10 दिसंबर 2025 को जारी हुआ। उनका दावा है कि दोनों प्रमाण पत्रों से संबंधित विवरणों में मृत्यु की जगह को लेकर अंतर है। चन्ना राजेश के मुताबिक, उनके पिता का निधन जिला अस्पताल दुर्ग में हुआ था, जबकि दूसरे आवेदन में मृत्यु घर पर होने का उल्लेख किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि दूसरे प्रमाण पत्र के लिए प्रस्तुत जानकारी का सत्यापन किस आधार पर किया गया और दोनों दस्तावेजों में अंतर होने के बावजूद प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ।

मुक्तिधाम की रसीद और पार्षद के लेटरहेड का उल्लेख

शिकायतकर्ता ने दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया है कि दूसरे मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए अलग-अलग दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। उनके अनुसार, 12 सितंबर 2025 को रामनगर मुक्तिधाम से रसीद की प्रति प्राप्त की गई थी। इसके बाद 27 नवंबर 2025 को वार्ड क्रमांक-38 के पार्षद पीयूष मिश्रा के लेटरहेड पर कथित तौर पर यह उल्लेख कराया गया कि सीएच अप्पा राव का निधन सड़क क्रमांक-15, वार्ड-38 स्थित एक मकान में हुआ था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दस्तावेज के आधार पर दूसरे मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया गया और 10 दिसंबर 2025 को प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों का आधिकारिक सत्यापन होना बाकी है।

वार्ड-38 के लेटरहेड पर वार्ड-45 का पता, उठे सवाल

मामले में पते को लेकर भी विसंगति का आरोप लगाया गया है। चन्ना राजेश के अनुसार, पार्षद के लेटरहेड पर मृतक का पता सड़क क्रमांक-15, वार्ड-38 दर्ज है, जबकि दूसरे मृत्यु प्रमाण पत्र में वार्ड क्रमांक-45 का पता बताया गया है। वार्ड-45 के पार्षद पी. श्याम सुंदर राव हैं। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब आवेदन से जुड़े दस्तावेजों में मृत्यु की जगह और पते को लेकर अंतर था, तो संबंधित अधिकारियों ने इन तथ्यों की जांच कैसे की? क्या प्रमाण पत्र जारी करने से पहले सभी दस्तावेजों का भौतिक या अभिलेखीय सत्यापन किया गया था? यदि सत्यापन हुआ, तो इन विसंगतियों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?

कलेक्टर और निगम आयुक्त से जांच की मांग

चन्ना राजेश ने कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को शिकायत देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दूसरे मृत्यु प्रमाण पत्र को जारी किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की है। अब इस मामले में प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होगी। यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि दोनों प्रमाण पत्र किन आवेदनों और दस्तावेजों के आधार पर जारी किए गए, दूसरे प्रमाण पत्र के लिए किस अधिकारी या कर्मचारी ने सत्यापन किया और क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था।