प्रमुख मार्गों पर धरना-प्रदर्शन, रैली और जुलूस पर रोक
जिला अस्पताल, स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में कामकाज प्रभावित होने के बाद प्रशासन का फैसला; तितुरडीह में बनाया गया वैकल्पिक धरना स्थल

दुर्ग। जिला मुख्यालय के प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर अब राजनीतिक, सामाजिक, व्यावसायिक और कर्मचारी संगठनों के धरना-प्रदर्शन, रैली, सभा और जुलूस आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अभिजीत सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
प्रशासन ने इन आयोजनों के लिए तितुरडीह में वैकल्पिक स्थल निर्धारित किया है। विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंधित मार्गों पर आयोजन की अनुमति देने का अधिकार एसडीएम दुर्ग शहर को दिया गया है।
इन मार्गों पर लागू रहेगा प्रतिबंध
आदेश के तहत दुर्ग मुख्यालय के इन प्रमुख मार्गों और उनके किनारे धरना, प्रदर्शन, रैली, सभा और जुलूस पर रोक लगाई गई है।
- राजनांदगांव-पुलगांव-दुर्ग मुख्य मार्ग पर गंजपारा चौक से मालवीय नगर चौक तक।
- जेआरडी स्कूल से दुर्ग सेंट्रल जेल के मुख्य गेट तक।
- कब्रिस्तान से केंद्रीय विद्यालय, आरटीओ कार्यालय, खालसा स्कूल होते हुए मालवीय नगर चौक तक।
- सुराना कॉलेज से मानस भवन मार्ग होते हुए चर्च चौक तक।
इन स्थानों पर टेबल, कुर्सी, फर्नीचर, टेंट, शामियाना, माइक, साउंड सिस्टम आदि लगाकर भीड़ जुटाने पर भी प्रतिबंध रहेगा। पुलिस और प्रशासन को छोड़कर लाउडस्पीकर अथवा सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली तथा तेज ध्वनि उत्पन्न करने वाले अन्य उपकरणों का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित किया गया है।
अनुमति के लिए एक सप्ताह पहले देना होगा आवेदन
विशेष परिस्थितियों में प्रतिबंधित क्षेत्र में आयोजन की अनुमति चाहिए तो आयोजकों को कम से कम एक सप्ताह पहले एसडीएम दुर्ग शहर के समक्ष आवेदन देना होगा। आवेदन में आयोजन से जुड़ी पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा। एसडीएम परिस्थितियों के आधार पर विभिन्न शर्तों के साथ अनुमति दे सकेंगे। शर्तों का उल्लंघन होने पर अनुमति स्वत: निरस्त मानी जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि दी गई अनुमति किसी भी समय निरस्त की जा सकती है।
उल्लंघन पर जब्त होगा सामान, होगी कानूनी कार्रवाई
प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर मौके पर लगाए गए टेंट, शामियाना, फर्नीचर, साउंड सिस्टम, लाउडस्पीकर, बैनर और अन्य सामग्री जब्त की जाएगी। संबंधित व्यक्ति या संस्था के पदाधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223, 125, 126, 285 समेत अन्य सुसंगत धाराओं के तहत अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।
जिला अस्पताल और सरकारी दफ्तरों की वजह से बढ़ी परेशानी
प्रशासन के अनुसार इन मार्गों पर जिला पंचायत, जीएसटी, वन विभाग, परिवहन विभाग, विद्युत विभाग, श्रम विभाग, सेंट्रल जेल, महिला एवं बाल विकास विभाग, आदिवासी विकास विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, पंजीयन कार्यालय, नगर निगम, कलेक्टर कार्यालय, जिला न्यायालय और एसपी कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। इसी क्षेत्र में जिला अस्पताल, लोक निर्माण विभाग का विश्रामगृह और बैठक कक्ष भी हैं। लगातार होने वाले धरना-प्रदर्शन और रैलियों से इन संस्थानों के कामकाज पर असर पड़ने के साथ ही यातायात बाधित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
मरीजों और एंबुलेंस के आवागमन का दिया हवाला
प्रशासन ने बताया कि जिला अस्पताल में दुर्ग जिले के साथ पूरे संभाग से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। धरना-प्रदर्शन और भीड़ के कारण अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों को परेशानी होती है। कई बार एंबुलेंस के आवागमन पर भी असर पड़ता है। शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित होने तथा सरकारी बैठकों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों के आवागमन के दौरान सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था प्रभावित होने का भी हवाला दिया गया है।
तितुरडीह में बनेगा धरना-प्रदर्शन स्थल
प्रशासन ने धरना-प्रदर्शन के लिए तितुरडीह में नगर निगम दुर्ग के जल शोधन संयंत्र के सामने स्थित रिक्त परिसर को चिन्हित किया है। यह परिसर नजूल शीट क्रमांक 90 के प्लॉट नंबर 7/2 में स्थित है। एसएसपी दुर्ग, एसडीएम दुर्ग और नगर निगम दुर्ग की अनुशंसा के बाद इस स्थल को धरना-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त माना गया है।
रायपुर के तूता मैदान की तर्ज पर व्यवस्था
प्रशासन ने रायपुर जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि शहर के सघन इलाकों में लगातार होने वाले धरना-प्रदर्शनों को देखते हुए कुछ वर्ष पहले नया रायपुर के तूता मैदान को धरना-प्रदर्शन स्थल के रूप में निर्धारित किया गया था। इसी तर्ज पर दुर्ग में भी तितुरडीह के इस परिसर को निर्धारित किया गया है।
