भाजपा नेता व स्कूल संचालक अतुल की हत्या ने खोले कई राज, डार्क सीक्रेट्स और तस्करी नेटवर्क की जांच तेज

मेरठ के हस्तिनापुर में भाजपा युवा मोर्चा नेता और स्कूल संचालक अतुल की हत्या मामले में पत्नी, प्रेमी और जहरीले सांप की साजिश का खुलासा हुआ है। पुलिस अब वन्यजीव तस्करी, नशीली दवाओं और हत्या की पूरी साजिश की जांच में जुटी है।

भाजपा नेता व स्कूल संचालक अतुल की हत्या ने खोले कई राज, डार्क सीक्रेट्स और तस्करी नेटवर्क की जांच तेज

मेरठ। हस्तिनापुर कस्बे में भाजपा युवा मोर्चा के मंडल महामंत्री और स्कूल संचालक अतुल की हत्या का मामला हर दिन नए खुलासे कर रहा है। पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने इस हत्याकांड को साधारण हत्या से कहीं अधिक गंभीर और रहस्यमय बना दिया है। पत्नी दामिनी, उसके प्रेमी और स्कूल वैन चालक तुषार की कथित साजिश ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।

पुलिस के अनुसार यह हत्या अचानक गुस्से या आवेश में नहीं की गई थी, बल्कि इसके पीछे महीनों की सुनियोजित तैयारी थी। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एक ऐसी योजना बनाई थी, जिससे हत्या को प्राकृतिक या दुर्घटनावश हुई घटना साबित किया जा सके।

पत्नी और प्रेमी पर हत्या की साजिश का आरोप

पुलिस जांच के मुताबिक अतुल की पत्नी दामिनी और उसके प्रेमी तुषार के बीच लंबे समय से संबंध थे। आरोप है कि दोनों ने मिलकर अतुल को रास्ते से हटाने की योजना बनाई और इसके लिए कई स्तरों पर तैयारी की गई।

मामले में पुलिस ने दामिनी, तुषार और कथित रूप से जहरीला कॉमन करैत सांप उपलब्ध कराने वाले उदय तथा सोनू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब पुलिस इन सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर आमने-सामने पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।

जहरीला सांप कहां से आया?

जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि हत्या में इस्तेमाल किए गए जहरीले कॉमन करैत सांप की व्यवस्था कैसे की गई। पुलिस को पता चला है कि गिरफ्तार किए गए उदय और सोनू पेशेवर सपेरे नहीं हैं। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि उन्हें इतना खतरनाक सांप कहां से मिला। जांच एजेंसियां अब इस पहलू पर भी काम कर रही हैं कि कहीं इसके पीछे वन्यजीव तस्करी का कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि सांप की उपलब्धता और उसके स्रोत का पता लगाया जा सके।

नशीली दवाओं का भी सुराग तलाश रही पुलिस

मामले की जांच सिर्फ हत्या तक सीमित नहीं है। पुलिस उन नशीली दवाओं के स्रोत की भी पड़ताल कर रही है जिनके इस्तेमाल की आशंका घटना से पहले जताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि दवाओं की सप्लाई चेन का पता चल जाता है तो हत्या की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचना आसान हो सकता है।

मोबाइल फोन बनेंगे सबसे बड़े गवाह

जांच टीम आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री और डिजिटल गतिविधियों की भी गहन जांच कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल डेटा से यह स्पष्ट हो सकेगा कि हत्या की योजना कब और कैसे बनाई गई। सूत्रों के अनुसार डिजिटल सबूतों में कई ऐसे संकेत मिले हैं जो हत्या की पूर्व योजना की ओर इशारा करते हैं। हालांकि पुलिस अभी आधिकारिक रूप से इन जानकारियों का खुलासा नहीं कर रही है।

रिमांड में खुल सकती हैं कई परतें

पुलिस का मानना है कि आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। विशेष रूप से यह जानना जरूरी है कि हत्या की पूरी योजना किसने बनाई, इसमें कौन-कौन शामिल था और क्या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति भी सक्रिय था। जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हत्या के बाद सबूत मिटाने या पुलिस को गुमराह करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए।

इलाके में चर्चा का विषय बना मामला

भाजपा युवा मोर्चा के मंडल महामंत्री और एक स्कूल संचालक की इस तरह हुई हत्या ने पूरे मेरठ और आसपास के क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोग इस बात से हैरान हैं कि एक पारिवारिक विवाद कथित रूप से इतनी भयावह साजिश में कैसे बदल गया। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में रिमांड और फॉरेंसिक जांच से इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड के कई और चौंकाने वाले राज सामने आने की संभावना है।