यज्ञ और हवन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत हैं-संत श्री माताजी
नवरात्रि में आस्था का सैलाब: तीर्थराज देवी निकुंभला मंदिर में दुर्गा महायज्ञ के चौथे दिन उमड़े श्रद्धालु





दुर्ग। चैत नवरात्रि के पावन अवसर पर जिले के निकुम स्थित तीर्थराज देवी निकुंभला मंदिर, जय शक्ति आश्रम में आयोजित दुर्गा महायज्ञ में आस्था और भक्ति का माहौल लगातार गहराता जा रहा है। रविवार को महायज्ञ के चौथे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे और पूरे श्रद्धाभाव के साथ यज्ञ में शामिल हुए।

सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी। प्रतिदिन की तरह आज भी सुबह 11 बजे विधि-विधान के साथ हवन प्रारंभ हुआ, जो दोपहर करीब 1 बजे तक चला। इस दौरान संस्थापक संत श्री माता जी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना और हवन संपन्न कराया। यज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं ने पूरे विश्वास और भक्ति के साथ आहुति देकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की कामना की। वातावरण मंत्रोच्चार और जयकारों से गूंजता रहा, जिससे पूरा आश्रम भक्तिमय हो उठा।

इस अवसर पर संत श्री माता जी ने श्रद्धालुओं को मंत्रों के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि यज्ञ और हवन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि सच्चे मन और श्रद्धा से दी गई आहुति से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है। महायज्ञ के दौरान दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे निकुम मंदिर क्षेत्र इन दिनों आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। आयोजन समिति के अनुसार नवरात्रि के पूरे अवधि में इसी तरह धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा, जिसमें प्रतिदिन हवन, पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। नवरात्रि के इस पावन आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को मजबूत किया है, बल्कि क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को भी जीवंत कर दिया है।
