34 ग्राहकों से किस्त राशि वसूलकर कंपनी में जमा नहीं की, पूर्व संगम मैनेजर गिरफ्तार
₹4.85 लाख के गबन के मामले में धमधा पुलिस की कार्रवाई, दल्लीराजहरा से पकड़ा गया आरोपी

दुर्ग। भारत फाइनेंसियल इन्क्लूजन लिमिटेड की धमधा शाखा में संगम मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे एक युवक पर 34 ग्राहकों से लोन की किस्त और बकाया राशि वसूलकर कंपनी में जमा नहीं करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने कुल 4 लाख 85 हजार 575 रुपये की राशि का गबन किया। घटना के बाद से फरार चल रहे आरोपी को धमधा पुलिस ने साइबर टीम की मदद और मुखबिर की सूचना के आधार पर दल्लीराजहरा, जिला बालोद से गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक 8 अक्टूबर 2025 को भारत फाइनेंसियल इन्क्लूजन लिमिटेड धमधा शाखा के पूर्व क्रेडिट मैनेजर ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार रणजीत सिंह (28) कंपनी की धमधा शाखा में करीब छह माह तक संगम मैनेजर के पद पर कार्यरत था। उसका काम कंपनी से जुड़े सदस्यों को गांवों में लोन वितरित करने के साथ ही उनसे लोन की किस्त और बकाया राशि वसूलकर कार्यालय में जमा करना था।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी ने 26 दिसंबर 2023 की सुबह 8 बजे से 28 मई 2024 की शाम 7 बजे के बीच 34 सदस्यों से किस्त और बकाया राशि प्राप्त की, लेकिन इन पैसों को कंपनी के कार्यालय में जमा नहीं किया। पुलिस के अनुसार कुल ₹4,85,575 की राशि कंपनी और संबंधित सदस्यों के साथ धोखाधड़ी करते हुए गबन की गई।
फरारी के बाद दल्लीराजहरा में मिला आरोपी
घटना के बाद से आरोपी लगातार फरार चल रहा था। धमधा पुलिस उसकी संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से आरोपी के दल्लीराजहरा में होने की सूचना मिली। साइबर टीम की तकनीकी सहायता से उसकी जानकारी जुटाई गई और पुलिस टीम ने दल्लीराजहरा पहुंचकर आरोपी को पकड़ लिया।
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस के सामने घटना करना स्वीकार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने गबन की रकम को खाने-पीने में खर्च करना बताया है। प्रकरण में फिलहाल किसी नगद राशि की बरामदगी दर्शाई नहीं गई है।
आरोपी रणजीत सिंह, उम्र 28 वर्ष, निवासी एकलव्य नगर, दल्लीराजहरा, जिला बालोद को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेजे जाने की कार्रवाई की गई।
ऐसे करता था गबन
पुलिस के अनुसार आरोपी संगम मैनेजर के तौर पर ग्राहकों से लोन की किस्त और बकाया राशि वसूलता था। राशि प्राप्त करने के बाद उसे कंपनी के कार्यालय में जमा करने के बजाय अपने पास रख लेता था और बाद में निजी खर्च में इस्तेमाल करता था।
