जनसेवा और जनसंघर्ष के दम पर महापौर की दौड़ में मदन सेन, भिलाई की राजनीति में मजबूत दावेदारी की तैयारी
युवा शक्ति संगठन और श्रीराम जन्मोत्सव समिति के अध्यक्ष मदन सेन ने पांच वर्षों में कई जनहित के मुद्दों पर उठाई आवाज, अतिक्रमण, पेयजल, पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं को लेकर किए आंदोलन; अब नगर निगम की कमान संभालने की इच्छा।

भिलाई। राजनीति में किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद या संगठन से नहीं, बल्कि जनता के बीच उसकी सक्रियता और जनसमस्याओं को लेकर किए गए प्रयासों से बनती है। भिलाई में युवा शक्ति संगठन के अध्यक्ष एवं श्रीराम जन्मोत्सव समिति के अध्यक्ष मदन सेन भी एक ऐसे ही नाम के रूप में अपनी पहचान बनाने में जुटे हैं। सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में लगातार सक्रिय रहने वाले मदन सेन अब भिलाई नगर निगम के महापौर पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी में हैं। उनकी इस राजनीतिक महत्वाकांक्षा के पीछे पिछले कई वर्षों से किए गए सामाजिक कार्यों और स्थानीय मुद्दों पर संघर्ष को प्रमुख आधार माना जा रहा है।
मदन सेन का कहना है कि शहर के विकास के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने पिछले पांच वर्षों में भिलाई नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर आवाज उठाई है। उनके द्वारा किए गए कार्यों में पेयजल, अवैध कब्जे, पर्यावरण संरक्षण, तालाबों की सुरक्षा, सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने और बुनियादी नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दे शामिल हैं।
बुचड़खाने के खिलाफ जनआंदोलन से मिली पहचान
मदन सेन के जनहित से जुड़े प्रमुख आंदोलनों में भिलाई-दुर्ग क्षेत्र के बड़े बुचड़खाने को लेकर किया गया आंदोलन भी शामिल है। पोस्टर में दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने इस मुद्दे को लेकर जनआंदोलन किया और न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से घनी आबादी वाले क्षेत्र से बुचड़खाने को बंद कराने की मांग उठाई। उनका मानना रहा है कि शहर के रिहायशी क्षेत्रों में आम नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
पर्यावरण और नगर निगम की जवाबदेही का मुद्दा उठाया
भिलाई में पर्यावरण संरक्षण और तालाबों की सुरक्षा को लेकर भी मदन सेन सक्रिय रहे हैं। पर्यावरण बोर्ड और एनजीटी से जुड़े मामले में भिलाई नगर निगम पर 2 करोड़ 63 लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने का उल्लेख उनके जनहित कार्यों की सूची में किया गया है। इसके अलावा नगर निगम क्षेत्र के तालाबों के संरक्षण के लिए भी उन्होंने जनआंदोलन किया। उनका प्रयास रहा कि शहर की प्राकृतिक संपत्तियों को सुरक्षित रखा जाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित हो।
पेयजल संकट से लेकर अवैध कब्जों तक उठाई आवाज
जनता की बुनियादी जरूरतों को लेकर भी मदन सेन ने कई बार आंदोलन का रास्ता अपनाया। मैत्री विहार कॉलोनी में ईडब्ल्यूएस की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का मुद्दा उठाया गया। इसी तरह नगर निगम क्षेत्र के इबान क्षेत्र और कोसा नगर में स्थानीय समस्याओं को लेकर जनआंदोलन किया गया।
रेशने आवास क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाए जाने के बावजूद लगभग 500 मीटर दूर स्थित कॉलोनी में करीब 16 वर्षों से पेयजल नहीं पहुंचने का मामला भी उनके द्वारा उठाया गया। आंदोलन के बाद वहां पानी पहुंचाने की पहल किए जाने का दावा किया गया है। यह मामला बताता है कि शहरी विकास की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम छोर पर रहने वाले नागरिकों तक पहुंचना कितना जरूरी है।
शासकीय जमीन और स्कूलों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की पहल
नगर निगम क्षेत्र में शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जे का मुद्दा भी मदन सेन द्वारा उठाया जाता रहा है। कोहका क्षेत्र में करोड़ों रुपये की शासकीय जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए जनआंदोलन किया गया। वहीं मैत्री विहार कॉलोनी में ईडब्ल्यूएस की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का प्रयास किया गया।
इसके अलावा नगर निगम क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों में किए गए अवैध कब्जों को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। पोस्टर में दी गई जानकारी के अनुसार, न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से स्कूल परिसरों को कब्जे से मुक्त कराने की पहल की गई, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
स्थानीय समस्याओं पर भी लगातार सक्रियता
मदन सेन ने सुपेला लक्ष्मी मार्केट गदा चौक से अंग्रेजी शराब दुकान को अन्यत्र हटाने के लिए भी जनआंदोलन किया। इसके अलावा सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर नगर निगम क्षेत्र में लगातार संघर्ष करने की बात कही गई है। उनका कहना है कि आम नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए।
महापौर पद के लिए दावेदारी की तैयारी
सामाजिक संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले मदन सेन अब अपनी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता को नगर निगम के नेतृत्व तक ले जाने की इच्छा रखते हैं। भिलाई नगर निगम के महापौर पद के लिए दावेदारी करने की उनकी तैयारी को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मदन सेन की दावेदारी के पीछे उनका तर्क है कि नगर निगम का नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो शहर की गलियों, बस्तियों, कॉलोनियों और आम नागरिकों की समस्याओं से सीधे जुड़ा हो। शहर के विकास के साथ-साथ पेयजल, सफाई, सड़क, नाली, शिक्षा, पर्यावरण और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
भिलाई जैसे औद्योगिक शहर में विकास की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में महापौर पद की दावेदारी को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। मदन सेन अपनी सामाजिक सक्रियता और जनहित के मुद्दों पर किए गए आंदोलनों के आधार पर इस दौड़ में अपनी जगह बनाने की तैयारी कर रहे हैं।