अर्नब चक्रवात से फसल नुकसान पर 72 घंटे के भीतर दें सूचना, तभी मिलेगा बीमा क्लेम का लाभ

किसानों के लिए टोल फ्री नंबर 14447 जारी, व्हाट्सऐप नंबर 7065514447 पर भी भेज सकते हैं फसल नुकसान का विवरण

अर्नब चक्रवात से फसल नुकसान पर 72 घंटे के भीतर दें सूचना, तभी मिलेगा बीमा क्लेम का लाभ

दुर्ग। चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से जिले में हो रही भारी बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। असमय बारिश के कारण खरीफ फसलों को नुकसान होने की आशंका है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित किसानों से फसल नुकसान की सूचना तत्काल देने की अपील की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय आपदा या फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल को नुकसान होने पर किसानों को 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। इसके लिए टोल फ्री नंबर 14447 जारी किया गया है।

खरीफ की 10 फसलें बीमा योजना में शामिल

उपसंचालक कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, खरीफ 2026 के लिए जिले में धान (सिंचित एवं असिंचित), मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, कोदो, कुटकी और रागी को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अधिसूचित किया गया है। योजना में प्रतिकूल मौसम के कारण फसल की बुवाई या रोपाई नहीं हो पाने, स्थानीय आपदाओं तथा फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई उपज को होने वाले नुकसान को शामिल किया गया है।

72 घंटे में सूचना देना जरूरी

कृषि विभाग के अनुसार, ओलावृष्टि, जलप्लावन और अतिवृष्टि जैसी स्थानीय आपदाओं से फसल को नुकसान होने पर बीमा योजना के तहत राहत का प्रावधान है। वहीं कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल को नुकसान होने पर भी दावा किया जा सकता है। ऐसे मामलों में अंतरिम राहत का प्रावधान है, लेकिन किसानों को घटना के 72 घंटे के भीतर नुकसान की जानकारी देना जरूरी है।

इन माध्यमों से दर्ज करा सकते हैं शिकायत

फसल नुकसान की सूचना देने के लिए किसान केंद्र सरकार के कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधिकृत व्हाट्सऐप नंबर 7065514447 पर भी नुकसान का विवरण भेज सकते हैं। किसान आधिकारिक पोर्टल www.pmfby.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके साथ ही गूगल प्ले स्टोर से क्रॉप इंश्योरेंस ऐप डाउनलोड कर स्वयं फसल नुकसान का विवरण दर्ज कर सकते हैं। किसान अपने क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, राजस्व विभाग, संबंधित बैंक या बीमा कंपनी को भी निर्धारित समय सीमा में सूचना दे सकते हैं।