वैशालीनगर कालीबाड़ी में 50वें दुर्गोत्सव की भव्य तैयारी, कोलकाता के कलाकार बना रहे आकर्षक पंडाल

षष्ठी से दशमी तक पूजा-अनुष्ठान के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतिदिन भंडारे का आयोजन

वैशालीनगर कालीबाड़ी में 50वें दुर्गोत्सव की भव्य तैयारी, कोलकाता के कलाकार बना रहे आकर्षक पंडाल

भिलाई। वैशालीनगर कालीबाड़ी में इस वर्ष शारदीय दुर्गोत्सव को लेकर खास उत्साह है। कालीबाड़ी समिति द्वारा इस बार दुर्गोत्सव का 50वां वर्ष मनाया जा रहा है। स्वर्ण जयंती वर्ष को यादगार बनाने के लिए समिति ने विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। आकर्षक पंडाल और सजावट के लिए कोलकाता के कलाकारों को बुलाया गया है। इस बार थीम बेस पंडाल तैयार किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं और शहरवासियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहेगा। समिति का कहना है कि 50वें वर्ष के दुर्गोत्सव को धार्मिक आस्था, बंगाली संस्कृति और सामाजिक सहभागिता के साथ यादगार बनाने की तैयारी है। थीम बेस पंडाल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भंडारा और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के चलते इस बार वैशालीनगर कालीबाड़ी का दुर्गोत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहने की उम्मीद है।
दुर्गोत्सव के दौरान धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। वहीं श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन भंडारे की व्यवस्था की जाएगी। पूजा को लेकर समाज के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग तैयारियों में जुटे हुए हैं। शारदीय दुर्गा पूजा वर्ष 2026 का कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। आयोजन की शुरुआत 9 अक्टूबर को महालया अमावस्या पूजा के साथ होगी। रात 9 बजे महालया अमावस्या पूजा होगी। इसके बाद 10 अक्टूबर को सुबह 7 बजे तर्पण का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 16 अक्टूबर को महा षष्ठी मनाई जाएगी। सुबह 8 बजे षष्ठी पूजा, सुबह 9:30 बजे पुष्पांजलि तथा सुबह 7:30 बजे आमंत्रण एवं अधिवास का आयोजन होगा।
सप्तमी से अष्टमी तक विशेष पूजा
17 अक्टूबर को महा सप्तमी पूजा होगी। सुबह 9:30 बजे महा सप्तमी पूजा और दोपहर 12:30 बजे पुष्पांजलि होगी। 18 अक्टूबर को महा सप्तमी अधिक पूजा एवं महा अष्टमी पूजा का आयोजन किया जाएगा। सुबह 5:40 बजे महा सप्तमी अधिक पूजा, सुबह 9 बजे महा अष्टमी पूजा और सुबह 11:30 बजे पुष्पांजलि होगी। 19 अक्टूबर को महा अष्टमी के विशेष अनुष्ठान होंगे। सुबह 5:30 बजे महा अष्टमी पूजा शुरू होगी। इसके बाद 7:26 बजे संधि पूजा प्रारंभ, 7:50 बजे बलिदान और 8:14 बजे संधि पूजा समापन होगा। शाम 6:45 बजे पुष्पांजलि होगी।
नवमी पर हवन, दशमी पर सिंदूर उत्सव और विसर्जन
20 अक्टूबर को महा नवमी पूजा होगी। सुबह 6:30 बजे महा नवमी पूजा, सुबह 9 बजे पुष्पांजलि और सुबह 10 बजे हवन किया जाएगा। वहीं 21 अक्टूबर को महा दशमी के साथ दुर्गोत्सव का समापन होगा। सुबह 7 बजे महा दशमी पूजा, सुबह 8 बजे पुष्पांजलि, सुबह 11:30 बजे सिंदूर उत्सव और शाम 5:30 बजे प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।
लक्ष्मी पूजा और काली पूजा भी होगी
दुर्गोत्सव के बाद 25 अक्टूबर को श्री श्री कोजागरी लक्ष्मी पूजा का आयोजन रात 9 बजे किया जाएगा। वहीं 8 नवंबर को श्री श्री काली पूजा होगी। शाम 7:30 बजे पूजा, सुबह 11:30 बजे पुष्पांजलि और दोपहर 1 बजे महाभोग का आयोजन किया जाएगा। महा सप्तमी, महा अष्टमी और महा नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए महाभोग की व्यवस्था रहेगी। पूरे आयोजन के दौरान पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
आयोजन को भव्य बनाने में जुटे पदाधिकारी और कार्यकर्ता
50वें दुर्गोत्सव को सफल बनाने के लिए कालीबाड़ी समाज के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं। सुप्रियो घोष, श्यामल मुखर्जी, बिमान दास गोरा, अभिजीत साहा, देबब्रत आईच, महेंद्र जायसवाल, शांतुनु घोष, भरत मजुमदार, सोभेन रॉय, संजीत चक्रवर्ती, डीके दत्ता, शिबु कर्मकार, अरुप रॉय, त्रिनाथ सोम और अर्पण चक्रवर्ती सहित समाज के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता आयोजन की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।