कक्षा 5वीं-8वीं वार्षिक परीक्षा 2026: DEO ने प्रधान पाठकों की बैठक लेकर दिए सख्त निर्देश

दुर्ग। कक्षा पांचवीं एवं आठवीं केंद्रीकृत वार्षिक परीक्षा सत्र 2026 के आयोजन को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) दुर्ग ने विकासखंड दुर्ग एवं पाटन के प्राथमिक/माध्यमिक विद्यालयों के प्रधान पाठकों की बैठक ली। बैठक में परीक्षा संबंधी राज्य स्तर से प्राप्त निर्देशों की जानकारी देते हुए समय-सीमा में सभी आवश्यक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

DEO ने स्पष्ट किया कि विद्यालय स्तर पर ब्लूप्रिंट के आधार पर सैंपल प्रश्नपत्र तैयार कर विद्यार्थियों को परीक्षा तिथि से पहले तक नियमित अभ्यास कराया जाए। इसके साथ ही निर्देश दिए गए कि 25 फरवरी 2026 तक कक्षा 5वीं एवं 8वीं के विद्यार्थियों को ब्लूप्रिंट अनिवार्य रूप से लिखवाया जाए, ताकि वे उसी आधार पर परीक्षा की तैयारी कर सकें। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी बच्चे को वार्षिक परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा।
प्रोजेक्ट कार्य की समय-सीमा तय
बैठक में प्रायोजना कार्य को लेकर भी निर्देश जारी किए गए।
कक्षा 5वीं: 5-5 अंक के 2 प्रोजेक्ट (कुल 10 अंक)
कक्षा 8वीं: 10-10 अंक के 2 प्रोजेक्ट (कुल 20 अंक)
इन प्रोजेक्ट कार्यों को 28 फरवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने तथा प्रत्येक विद्यार्थी के अंकों की सूची तैयार कर 3 मार्च 2026 तक विकासखंड शिक्षा अधिकारी को प्रेषित करने के निर्देश दिए गए।

स्कूलों का औचक निरीक्षण
DEO दुर्ग ने 30 जनवरी 2026 को जिले के शासकीय प्राथमिक शाला सिकोला, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला तुलसी, खुड़मुड़ी, तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खुड़मुड़ी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सभी शालाएं संचालित पाई गईं।
निरीक्षण के दौरान संस्था प्रमुखों को निर्देशित किया गया कि मध्यान्ह भोजन निर्धारित मीनू के अनुसार प्रदाय किया जाए। साथ ही विद्यार्थियों में बारहखड़ी, पहाड़ा, पुस्तक वाचन का नियमित अभ्यास कराया जाए और शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। शिक्षक एवं स्टाफ की नियत समय पर अनिवार्य उपस्थिति पर भी जोर दिया गया।
बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी पर फोकस
हाई/हायर सेकेण्डरी विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश दिए गए कि नियमित प्रायोगिक कार्य कराए जाएं। साथ ही ब्लूप्रिंट के अनुरूप पिछले 5 वर्षों के प्रश्नपत्र हल कराए जाएं। तिमाही एवं छमाही परीक्षा के आधार पर चिन्हांकित विद्यार्थियों को सीमित पाठ्यक्रम में बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कराने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा प्रायोगिक परीक्षा के बाद भी बोर्ड परीक्षा प्रारंभ होने तक विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया।
