भिलाई निगम में 12.66 करोड़ के पेवर ब्लॉक कार्यों पर घोटाले का आरोप, 33 कार्यों में अनियमितता का दावा, जांच से बचने फाइलें छुपाने का आरोप

भिलाई। नगर पालिका निगम भिलाई की परियोजना शाखा एक बार फिर विवादों में है। भाजपा पार्षद संतोष मौर्य ने परियोजना शाखा के अंतर्गत कराए गए पेवर ब्लॉक कार्यों में संगठित भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पिछले 23 महीनों में लगभग 12 करोड़ 66 लाख रुपये के कार्य स्वीकृत और भुगतान किए गए, जिनमें भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इन मुद्दों को लेकर भाजपा पार्षदों ने प्रेस कांफ्रेंस ली।

मौर्य ने 17 अक्टूबर 2025 को आयोजित नगर निगम की सामान्य सभा में विधिवत शपथ पत्र प्रस्तुत कर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अधिकांश पेवर ब्लॉक कार्य स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप नहीं किए गए। गुणवत्ता, मात्रा, स्थल चयन और भुगतान के स्तर पर गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। उनका आरोप है कि कम से कम 33 कार्यदेश ऐसे हैं जिनमें व्यापक अनियमितता हुई है। जिन स्थानों के लिए कार्य स्वीकृत किए गए, वहां काम नहीं हुआ। जहां काम हुआ, वहां स्वीकृत मानकों से कम गुणवत्ता और कम मात्रा में निर्माण कर पूरा भुगतान दर्शाया गया। राज्य शासन से जिन शर्तों और प्राक्कलनों के आधार पर स्वीकृति ली गई थी, उनका पालन नहीं किया गया। भाजपा पार्षद ने यह भी कहा कि इन मामलों की जांच कलेक्टर की प्रत्यक्ष निगरानी में नगर निगम से बाहर के अधिकारियों की संयुक्त समिति से कराई जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि उनके आरोप असत्य सिद्ध होते हैं तो उनकी पार्षदी तत्काल प्रभाव से शून्य कर दी जाए। मौर्य ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित फाइलों और दस्तावेजों को दबाने तथा गायब करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि जांच आगे न बढ़ सके। उनके मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई है और अब घोटाले को उजागर होने से बचाने की कोशिश हो रही है। इन आरोपों के बाद निगम प्रशासन और आयुक्त की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।

RTI का उल्लंघन? 12.66 करोड़ के पेवर ब्लॉक कार्यों में 20 फाइलें अब भी गायब
नगर पालिका निगम भिलाई की परियोजना शाखा पर पेवर ब्लॉक कार्यों में अनियमितता के आरोपों के बीच अब सूचना के अधिकार अधिनियम के उल्लंघन का मामला भी सामने आया है। भाजपा पार्षदों का आरोप है कि जानबूझकर पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। जानकारी के अनुसार, पार्षद महेश शर्मा ने 9 जून 2025 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत पेवर ब्लॉक कार्यों से संबंधित दस्तावेज और विवरण मांगे थे। आरोप है कि लंबे समय तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद भाजपा पार्षद संतोष मौर्य ने 7 नवंबर 2025 को पुनः विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया। विभाग की ओर से 22 जनवरी 2026 को केवल 13 फाइलों से संबंधित जानकारी दी गई, जिसे अधूरा और अस्पष्ट बताया जा रहा है। इन 13 फाइलों की अनुमानित लागत करीब 6 करोड़ 20 लाख रुपये बताई गई है। भाजपा पार्षदों का दावा है कि अभी भी 20 फाइलें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिनकी अनुमानित कार्यदेश लागत करीब 6 करोड़ 40 लाख रुपये है। उनका कहना है कि यदि सभी फाइलें सामने आ जाएं तो वित्तीय अनियमितताओं की तस्वीर और साफ हो सकती है। आरोप है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी को रोका जाना यह दर्शाता है कि परियोजना शाखा पारदर्शिता से बचना चाहती है।